शनिवार, 10 सितंबर 2011

हाइटैक हुआ पितरों के निमित्त तर्पण



प्रवासी भारतीय इंटरनेट के जरिए शहर के पंडितों से करा रहे हैं तर्पण
अब पितृों के लिए तर्पण की विधि भी हाइटेक हो गई है। प्रवासी भारतीय इंटरनेट के माध्यम से शहर के पंडितों के दिशा-निर्देशों पर वहां पर पितृों के निमित्त तर्पण कर रहे हैं।
इन लोगों का मानना है कि देश से दूर रहकर भी वह संस्कार को आसानी से दिलोदिमाग से नहीं निकाल सकते। यहां की मर्यादाएं आज भी हमें अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने की याद दिलाती है।
यूं करते हैं पितृ तर्पण
निश्चित तिथि पर थाली में संकल्प स्वरूप पकवान आदि रखकर और अक्षत, पुष्प व चंदन से वेब कैमरे के माध्यम से पंडितों के निर्देशानुसार पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण व दान आदि करते हैं। भारतीय समय व विदेशी समय के बीच तालमेल बैठाकर जयपुर के पंडित इंटरनेट के माध्यम से तर्पण करवाते हैं।
संस्कृति के प्रति लगाव बढ़ा घ् गुरुकुल वेदाश्रम के संस्थापक मनोहर चतुर्वेदी के अनुसार विदेशों में रहने वाले भारतीयों में अपनी संस्कृति और पूर्वजों के प्रति श्रद्धाभाव बढ़ा है। भारतीय समयानुसार लंदन में उद्योगपति ध्रुवसिंह ने शाम को तर्पण करवाया था।
समय का अभाव, इंटरनेट का रुझान - पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार वर्तमान में समय की कमी और इंटरनेट के प्रति बढ़ते रुझान ने भी पितृ तर्पण की विधि को हाइटेक बना दिया है। इन दिनों विदेशों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय पितृ तर्पण करा रहे हैं। अब तक चार प्रवासी भारतीयों का इंटरनेट के माध्यम से तर्पण करवा चुका हूं।
केस-1
पितृों को तर्पण करना जरूरी है। श्राद्ध पक्ष के अलावा दीपावली पर भी ऑनलाइन पूजा पाठ कराते हैं-ध्रुव सिंह तौमर, लंदन।
केस-2
यहां समय का अभाव और पंडित नहीं मिलने से ऑनलाइन पितृ पक्ष के दौरान पूजा करानी पड़ी। -एस.एन.गुप्ता, अमेरिका।
केस-3
अपनी मर्यादा को बनाए रखने तथा पितृों को याद करते हुए उनके लिए तर्पण करना बहुत जरूरी है।-विजया शर्मा, लंदन।
केस-4
यह पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक ही आता है। इस दौरान शुभ कार्य बाधित होते हैं और पितृों का आशीर्वाद जरूरी होता है-सिया देवी, सिंगापुर।

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